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जब नेहरू की दूरदर्शिता और इंदिरा के सबल नेतृत्व ने बनाया भारत को परमाणु शक्ति

Pokhran - 1

18 मई, 1974 को बुद्ध जयंती थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उस दिन एक फोन का इंतजार कर रही थीं। उनके पास एक वैज्ञानिक का फोन आता है और वह कहते हैं “बुद्ध मुस्कराए”। इस संदेश का मतलब था कि भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दिया है, जो सफल रहा।

आज से 46 साल पहले भारत ने पहला परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था. श्रीमती इंदिरा गांधी के सबल और कुशल नेतृत्व में भारत ने ये करिश्मा कर दिखाया था.

18 मई को जो परीक्षण पोखरण में हुआ, उसकी नींव दूरदृष्टि और कड़े इरादे वाली लौह महिला श्रीमती इंदिरा गांधी ने सात वर्ष पूर्व ही रख दी थी।

इस दिन की भारत के लिए महत्ता इस बात से समझी जा सकती है की, जब मई 18 मई 1974 को भारत ने पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया तो अमेरिका और दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न देश इतने चकित रह गए कि किसी को यह समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इसलिए आनन् फानन में इन देशों ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए NSG की शुरुआत करी थी. अमेरिका ये नहीं समझ पा रहा था की आखिर खुफिया एजेंसियों और सैटेलाइट को इसकी भनक कैसे नहीं लगी? इस परीक्षण का नतीजा यह हुआ था अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे। लेकिन श्रीमती इंदिरा गांधी ने इस चुनौती को भी स्वीकार किया था। उस समय सोवियत संघ ने हमारी बहुत मदद की थी.

इस परीक्षण की एक खासियत यह भी थी की यह पहला ऐसा परमाणु हथीयार परीक्षण था जो की सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी देशों से बाहर किसी देश ने किया था. भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के तत्कालीन अध्यक्ष राजा रमन्ना ने इस पूरे टेस्ट की कमान संभाली थी।

परीक्षण के लिए के लिए जो कोड वर्ड तय किया गया था वो था ‘बुद्धा इज स्माइलिंग’।

वैसे इस परीक्षण की नींव तो देश के स्वंतंत्र होने के बाद ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की आधारशिला रखने वाले पंडित जवाहरला नेहरू के दूरदर्शी नेतृत्व में हो गयी थी थी, 1948 में नेहरू सरकार “न्यूक्लिअर एनर्जी एक्ट” पारित करके डॉ होमी जहांगीर भाबा को इस क्षेत्र में अनुसन्धान शुरू करने की कमान सौंप दी थी, उधर 1958 में भारत में परमाणु ईंधन प्रसंस्करण पर भी “प्रोजेक्ट फोनिक्स” नाम से काम शुरू हो गया

इन सब क्षेत्रों में भारत को अमेरिका का भी सहयोग मिल रहा था, लेकिन 1962 के चीन युद्ध के बाद रिश्तों में थोड़ी तल्खी आयी तो भारत ने तत्कालीन सोवियत संघ से शता का अनुरोध किया, लेकिन वह भी क्यूबा के मिसाइल विवाद के चलते सहयोग करने में आनाकानी कर रहा था,
तब नेहरू जी ने निर्णय लिया अब समय आ गया है की देश को स्वयं परमाणु क्षेत्र में अपने पैरों पर खड़े होकर इस क्षेत्र में भारत का परचम लहराना है

दुर्भाग्य से होमी जहांगीर भाभा का 1966 में निधन हो गया, तब मजबूत इरादों की धनी श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भाभा के अनुसन्धान और परमाणु क्षेत्र ने कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए विक्रम साराभाई, राजा रमन्ना, होमी सेठना और पी के अयंगार जैसे वैज्ञानिकों को इसकी कमान सौंपी

उधर दिसम्बर 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने USS Enterprise नमक युद्धक बेड़े को बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा, सोवियत संघ ने इसके जवाब में व्लादिवोस्तक से नुक्लिअर मिसाइलों से सज्जित एक पनडुब्बी अमेरिकी बेड़े के पीछे भेज दी, सोवियत संघ के इस जवाब ने श्रीमती इंदिरा गाँधी को परमाणु हथियारों की deterrent value से परिचय कराया।

7 सितम्बर 1972 को श्रीमती गाँधी ने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर को एक nuclear device तैयार करने के अधिकृत कर दिया और परीक्षण के लिए तैयार रहने को कहा. 75 वैज्ञानिक और इंजीनियरों की टीम ने जमकर मेहनत की। इस प्रोजेक्ट इतना गुप्त रखा गया था कि तत्कालीन रक्षा मंत्री श्री जगजीवन राम” तक को भी इसकी जानकारी नहीं थी।

परमाणु बम का वजन 1400 किलो और व्यास (डायमीटर) 1.25 मीटर था इसको भारतीय सेना की निगरानी में बहुत ही गुप्त तरीके से रेत में छुपाकर पोकरण ले जाया गया था, और सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर सेना के थार रेगिस्तान में पोखरण टेस्ट रेंज में विस्फोट किया गया. कहा जाता है कि आठ से दस किलोमीटर इलाके में धरती हिल गई थी.

इस अद्वितीय चरम सफलता के पीछे पंडित जवाहरलाल नेहरू की वैज्ञानिक सोच और दूरदर्शिता, तथा कड़े फैसले लेने वाली मजबूत इरादों के इंदिरा गाँधी के प्रबल प्रभावी नेतृत्व को जाता है, उधर होमी जहांगीर भाभा, होमी सेठना राजा रमन्ना, विक्रम साराभाई, नागचौधरी, रंगोपाल चिदंबरम, पि के अयंगार जैसे देश के महान सपूतों को भी उनके इस महती कार्य हेतु कृतज्ञ राष्ट्र याद करता है.

जब परीक्षण सफल हो गया तब अगली समस्या आयी थी कि इस ख़बर को दिल्ली श्रीमती इंदिरा गाँधी तक कैसे पहुँचाया जाए?
इस ख़बर को दिल्ली श्रीमती इंदिरा गाँधी तक पहुँचाने के लिए सेना ने विशेष हॉट लाइन की व्यवस्था की थी. डॉ होमी नुसेरवानजी सेठना का कई प्रयासों के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क स्थापित हुआ. सेठना फोन के दूसरी और बैठे प्रधानमंत्री के निजी सचिव पी एन धर से बोले, “धर साहब एवरी थिंग हैज़ गॉन… ” तभी लाइन डेड हो गई.
सेठना ने सोचा कि धर को कहीं ये न लगा हो कि परमाणु परीक्षण फ़ेल हो गया है. उन्होंने तुरंत सेना की जीप ली और लेफ़्टिनेंट कर्नल पीपी सभरवाल को साथ लेकर तेजी से ड्राइव करते हुए पोखरण गाँव पहुँचे जहाँ भारतीय सेना का एक टेलिफ़ोन एक्सचेंज था.
लाइन पर करीब करीब चीखते हुए सेठना ने प्रधानमंत्री के निजी सचिव पृथ्वी नाथ धर को वो मशहूर कोड वर्ड कहा, “बुद्धा इज़ स्माइलिंग.”
उस समय इंदिरा गाँधी अपने लॉन में आम लोगों से मिल रही थीं. जब उन्होंने धर को आते हुए देखा तो वो लोगों से बात करना बंद उनकी तरफ़ दौड़ीं. उखड़ी हुई साँसों के बीच उन्होंने पीएन धर से पूछा, “क्या हो गया.” धर का जवाब था, “सब ठीक है मैडम.” अपनी आत्मकथा में धर ने लिखा है की, “मुझे अभी भी याद है कि ये सुनते ही इंदिरा गाँधी की बाँछे खिल गई थीं. एक जीत की मुस्कान को उनके चेहरे पर साफ़ पढ़ा जा सकता था.”

18 मई, 1974 को All India Radio पर बॉबी फ़िल्म का मशहूर गाना बज रहा था, “हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाबी खो जाए.” ठीक सुबह नौ बजे गाने को रोक कर आवाज आयी, “कृपया एक महत्वपूर्ण प्रसारण की प्रतीक्षा करें” फिर स्वर गूंजे , “आज सुबह आठ बजकर पांच मिनट पर भारत ने पश्चिमी भारत के एक अज्ञात स्थान पर शांतिपूर्ण कार्यों के लिए एक भूमिगत परमाणु परीक्षण किया”

बुद्ध मुस्कुराये और श्रीमती इंदिरा गांधी के सशक्त, प्रभावी नेतृत्व में 8 बजकर 5 मिनट पर भारत विश्व का छठा परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बन गया, और दुनिया में भारत पहला ऐसा देश बन गया, जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य न होते हुए भी परमाणु परीक्षण करने का साहस किया.

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