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लदाख में चीनी सैनिकों की बढ़ती सैन्य गतिविधि-नया और चिंताजनक प्रकरण

कर्नल अजय शुक्ला (Retd.)

सन 1999 में कारगिल क्षेत्र में हुई सैन्य घुसपैठ एवं उसके फलस्वरूप हुए सैन्य संघर्ष के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि इस साल अप्रैल के तीसरे हफ्ते में 5000 चीनी थल सेना के सैनिकों ने अर्थार्त पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों ने लद्दाख में 5 इलाकों में सैन्य घुसपैठ करी है जिसमें से चार इलाके गाल्वान नदी के समानांतर हैं और एक इलाका पैंगोंग झील के समीप है।
दोनों सेनाओं की सैन्य पेट्रोलिंग यूनिट्स अक्सर पेट्रोलिंग करते समय एक दूसरे के क्षेत्र में घुसपैठ कर लेती हैं जो कि एक आम बात है ।भारत और चीन के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं है और दोनों के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल अर्थार्त वास्तविक नियंत्रण रेखा है.चीन और भारत के बीच अंतराष्ट्रीय सीमा का विषय विवादित है।
गाल्वान नदी के शेत्र में जो वास्तविक नियंत्रण रेखा है अर्थात लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल है वो चीन द्वारा आधिकारिक रूप से दावा की गई सीमा रेखा से मेल खाती है । इसका मतलब यह हुआ कि अगर चीनी सेना ने 3 से 4 किलोमीटर गालवान घाटी के अंदर तक अपने सैनिक भेजे हैं तो चीन ने जिस सीमा रेखा का आधिकारिक रूप से दावा किया था , चीन ने उसी दावा रेखा अर्थार्त “क्लैम लाइन” का उल्लंघन कर डाला है।
2013 और 2014 में देपसांग और चुमार में रूटीन पेट्रोलिंग के समय जो चीनी सैनिकों से आमना सामना हुआ था और चीनी सैनिकों द्वारा विवादित क्षेत्र में अस्थाई रूप से अपना आधिपत्य स्थापित किया था , उन घटनाओं की तुलना में चीन की इस सैन्य घुसपैठ में काफी अंतर है क्योंकि इस बार 5000 सैनिकों ने घुसपैठ करी है और चीन की थल सेना ने इस बार बंकरों और खंदको का निर्माण भी किया है और सूत्रों की माने तो चीन ने अपने क्षेत्र में भारी वाहनों और आर्टिलरी बंदूकों का भी सैन्य गमनागमन एवम सैन्य संचलन (मिलिट्री मूवमेंट) भी शुरू कर दिया है।
चीन की थल सेना ने पैट्रोलिंग पॉइंट 14 से लेकर दूसरी लोकेशन गोगरा के बीच चार पॉइंट्स पर सैंकड़ो सैन्य टैंट स्थापित कर दिए हैं । 
अप्रैल के तीसरे हफ्ते में चीनी सैनिको की गाल्वान वैली(घाटी) में बड़ी संख्या में सैन्य घुसपैठ भारतीय सेना के लिए एक अप्रत्याशित घटना थी , तब से लेकर अब तक भारतीय सेना का ना तो चीनी थल सेना के साथ कोई आमना सामना हुआ है और ना ही कोई जवाबी कारवाई भारतीय सेना की तरफ से हुई है । 
सूत्रों के मुताबिक चीन की थल सेना विवादित क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रही है, ताजा रिपोर्ट के अनुसार चीन की थल सेना ने दक्षिण लद्दाख  क्षेत्र में भी अपनी घुसपैठ बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक पैंगोंग झील में चीनी सैनिकों द्वारा की गई सैन्य घुसपैठ के चलते हुई झड़प में कम से कम 72 भारतीय सैनिक घायल हुए थे ,इसमें से कुछ सैनिकों को दिल्ली,लद्दाख और चंडी मंदिर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। 
चीन की थल सेना द्वारा की जा रही सैन्य घुसपैठ कोई स्थानीय स्तर का सैन्य ऑपरेशन नही है या स्थानी स्तर की सैन्य कारवाई नही लगती ।ये सैन्य कारवाई विस्तारपूर्वक तरीके से पूरे क्षेत्र में संचालित की जा रही है औऱ चीनी थल सेना के विभिन्न ब्रिगेड और डिवीज़न इस पूरे क्षेत्र में अलग अलग जगहों पर इन सैन्य कार्रवाइयों का संचालन कर रहे हैं और मुख्य रूप से इस कारवाई का केंद्रिकृत समन्वय चीन के सैन्य थिएटर कमांड से हो रहा है । 
जब भारतीय सेना के पब्लिक इन्फॉर्मेशन डाईरेक्ट्रेट से इस विषय पर पुष्टिकरण के लिए सम्पर्क किया गया तब अधिकारियों ने इस विषय पर कोई भी बयान देने से मना कर ही दिया। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ ऑफिस और राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार अजीत डोवल इस विवाद पर भारतीय प्रतिक्रिया का निर्देशन और निरीक्षण कर रहे हैं । स्थानीय मिलिट्री स्तर पर चीनी सेना से समिति सम्पर्क लेह कॉपर्स के द्वारा किया जाता है । सूत्रों की माने तो चीन की सेना ने बॉर्डर मैनेजमेंट पोस्चर के तहत फ्लैग मीटिंग्स के विषय पर भी अपना जवाब या आधिकारिक प्रतिक्रिया देनी बन्द कर दी है।सीनियर अधिकरियों के मुताबिक क्योंकि अभी सैन्य गतिरोध कायम है इसलिए कोई भी संपर्क चीन की थल सेना से नही है ।
चीन के इस प्रकार से आक्रमक होने का एक और प्रमाण ये घटना भी है ,जब अप्रैल के अंत मे लेह कॉर्प्स का कमांडर भारतीय हेलीकॉप्टर में पैंगोंग झील के समीप भारतीय सैन्य चौकियों का हवाई सर्वे कर रहे थे तब दो चीनी सैन्य हेलीकॉप्टरों ने भारतीय हेलीकॉप्टर का पीछा किया। सेना ने माना की एक घटना हुई है जिसमे दोनो सेनाओं के हेलीकॉप्टर शामिल थे पर वो केवल एक सयोग था और कुछ नही। भारतीय वायु सेना के चीफ -एयर चीफ मार्शल आर.के.एस भदूरिया ने ये माना कि उस क्षेत्र में चीनी हेलीकॉप्टर कि गतिविधियाँ देखने को मिली थी पर वायु सेना ने इस संदर्भ में आवश्यक कारवाई करी है । 
चीन के इस आक्रमक सैन्य घुसपैठ को लेकर सरकार में बहुत कम स्पष्टता है । कुछ अधिकारी इसे बेजिंग की दंडात्मक कारवाई बता रहे है क्योंकि भारत ने नवंबर में पूर्व राज्य जम्मू कश्मीर का संशोधित नक्शा प्रकाशित किया था औऱ उसमें अक्साई चीन को भारत का हिस्सा दिखाया है । इसी अक्साई चीन पर चीन ने अपना कब्ज़ा जमा रखा है।
कुछ अधिकारियों और विशेषज्ञों का ये भी मत है की गाल्वान नदी का क्षेत्र रणनीतिक रूप से इसलिए हॉट स्पॉट बना हुआ है क्योंकि श्योक नदी के साथ होते हुए दौलत बेग ओल्डी तक भारत ने नई सड़क का निर्माण किया है । दौलत बेग ओल्डी लदाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सबसे सुदूर औऱ सैन्य दृष्टिकोण से सबसे असुरक्षित इलाकों के तौर पर चिन्हित है।
लदाख में 800 किलोमीटर की नियंत्रण रेखा पर पारंपरिक रूप से 5 मुख्य स्थानों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के दोनो तरफ विवाद है औऱ वो हैं चुमार, दमचौक ,पैंगोंग और दो स्थल दौलत बेग ओलडी के समीप हैं । चीनी थल सेना का गाल्वान नदी की घाटीयों में घुसपैठ करना एक नया और चिंताजनक प्रकरण है ।

नोट – ये ब्लॉग आर्टिकल/लेख /सम्पादकीय  ,अंग्रेजी में लिखे गये लेख “A new and worrying chapter: Ladakh intrusion by Chinese troops gathers momentum” का हिंदी अनुवाद है ।इस ब्लॉग आर्टिकल के मूल लेखक रक्षा विशेषज्ञ श्री अजय शुक्ला जी है। अनुवाद पूर्ण सावधानी एवं सजगता से किया गया है , ताकी लेख तकनीकी और तथ्यात्मक रूप से दोष रहित और यथातथ्य रहे। Note – This blog article is written by defense expert Ajai Shukla . Utmost care have been taken while translating this article from English to Hindi , so that there is no factual and technical distortion & misrepresentation of information in the article .

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