कोरोना महामारी के बीच घर पर ईद-उल-फ़ित्र मनाएंगे भारतीय।

रमज़ान का पाक महीना बस अलविदा कहने को तैयार है और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए इस बार ईद अलग होगी। कोरोना वायरस के कारण, दुनिया भर में कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। मुस्लिम देशों में भी सभी तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, लोगों को पवित्र रमजान के महीने में मस्जिदों में नमाज अदा नहीं करने के लिए कहा गया था ।

ऐसी स्थिति में, सऊदी अरब के सर्वोच्च मुफ्ती अब्दुल अजीज अल-शेख ने कहा कि असामान्य परिस्थितियों में और मौजूदा वैश्विक महामारी परिदृश्य में घर पर ईद की नमाज अदा करना उचित है। उन्होंने कहा कि घर में ईद की नमाज जमात व अकेले अदा की जा सकती है। सऊदी नागरिकों से घर पर ईद की नमाज़ अदा करने को कहा गया है, मुफ़्ती आज़म ने कहा कि इस तरह की महामारी की स्थिति में, माता-पिता को अपना अधिकांश समय अपने बच्चों के साथ घर पर बिताना चाहिए।

इसी तर्ज पर भारत के जिम्मेदार मुसलमानों ने भी भारतीय मुसलमानों को घर पर ईद की नमाज़ अदा करने का सुझाव दिया है। मुसलमानों के आध्यात्मिक नेताओं ने भी इस साल ईद-उल-फितर मनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

देश के सबसे प्रभावशाली इस्लामिक इदारे दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी कर भारतीय मुसलमानों को ईदगाह या मस्जिदों मैं जा कर नमाज़ अदा करेने के बजाय घर पर ईद की नमाज़ अदा करने को कहा है।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महाली ने सादगी के साथ ईद मानाने के लिए अपील की है, “चूंकि दुनिया कोरोना की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रही है और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, मैं सभी से ईद को सादगी से मनाने का अनुरोध करता हूं।”

इसी तरह की अपील शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने की है, उन्होंने लोगों से ईद-उल-फितर के दिन लॉकडाउन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए कहा।

भारतीय मुसलमानों के लिए सुन्नी और शिया दोनों मसलकों के मौलवियों ने कुछ दिशानिर्देश जारी किये हैं जो इस प्रकार हैं:

– अनावश्यक रूप से नए कपड़ों पर खर्च न करें, बल्कि इस बचत को गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।

– ईद की नमाज़ सार्वजनिक तौर पर मस्जिदों और ईदगाहों मैं न पड़ी जाये बल्कि घरों मैं अदा की जाये।

– पूरे देश में मस्जिदों / ईदगाहों में केवल 5 लोग नमाज-ए-ईद की अदा करें।

– ईद की नमाज से पहले जरूरतमंदों को सदका-ए-फित्र दें।

– ईद के दिन जितना संभव हो सके दुआ करें, क्योंकि ईद दुआ कुबूल होने का दिन है।

– मुल्क़ और दुनिया से कोरोनोवायरस महामारी से राहत के लिए अल्लाह से प्रार्थना करें।

– इस बार सादगी के साथ ईद मनाएं।

– ईद की मुबारकबाद देते समय एक दूसरे से गले न मिले न ही हाथ मिलाएं।

– फ़ोन व सोशल मीडिया के ज़रिये एक दूसरे को ईद की मुबारक़बाद दें।

आज कल सोशल मीडिया पर भी कई तरह के सन्देश पड़े जा रहे हैं  जैसे ” इस ईद पे नए कपडे न खरीदें, अपने सबसे अच्छे पुराने कपड़े पहने  ।” बहुत से संदेशों मैं लोगों को इस बार ज़ोर शोर से ईद मनाने के बजाये रूहानी ईद मनाने की अपील की जा रही है, साथ ही जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस का भुगतान करने या किसी ऐसे व्यक्ति के कमरे का किराया देने में मदद करने का आग्रह करते हैं, जिसने लॉक डाउन के कारण अपनी आजीविका खो दी है। देश भर से मिल रही तस्वीरों मैं देखा जा सकता है किस प्रकार मुस्लिम युवा और संगठन प्रवासी और दैनिक आजीविका पर निर्भर मज़दूरों की मदद कर रहे हैं।